स्वयं को ही नहीं, प्रभू को भी धोखा : जिनकी लेखनी अनुकूल कृति प्रवृत्ति निवृत्ति नहीं 


के कुमार आहूजा  2026-09-27 18:19:46



विकार विरक्त होने में शुद्ध स्वस्थ आहार की महत्ता कम नहीं..

स्वयं को ही नहीं, प्रभू को भी धोखा : जिनकी लेखनी अनुकूल कृति प्रवृत्ति निवृत्ति नहीं 

पूर्वजों के पुण्य स्मरण में हमने कभी जड़ों को देखा नहीं...

रे मन तूं सीधो सीधो चाल मन रे वश में चाले तो 

स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम राष्ट्रीय कवि चौपाल, 587 वीं कड़ी *विषय विकार परे साहित्यकार* एवं बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ सामयिक विषय को समर्पित रही, आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में श्री मती इन्द्रा व्यास मुख्य अतिथि में मनिषा आर्य सोनी विशिष्ट अतिथि में श्रीमती अल्का डोली पाठक आदि मंच सुशोभित हूए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि साहित्यकार लेखन और वाचन करते हैं ,पर श्रुति अनुकूल वृत्ति कृति प्रवृत्ति निवृत्ति नहीं है तो निःसंदेह वह स्वयं के साथ प्रभो को धोखा कर रहा है 

    कार्यक्रम अध्यक्ष इन्द्रा व्यास अध्यक्षीय उद्बोधन में विषय विकार से परे साहित्यकार से वृहद विषय पर सरलता बात रखी कि विकार विरक्त होने में शुद्ध आहार की महत्ता कम नहीं आंकी जा सकती.. मुख्य अतिथि मनीषा आर्य सोनी ने सामयिक बोद्धिक में कहा पूर्वजों के पुण्य स्मरण में हमने कभी जड़ों को देखा नहीं... सम्बंधित गीत माध्यम से अपनी बात कही कि ये जीवन है मृग तृष्णा, दिखता कुछ और पाया कुछ है.. अलका डोली पाठक : सकारात्मक सोच को परिपूर्ण उद्बोधन जीएं और जीने दें, का संदेश देकर अभिभूत किया सरदार अली परिहार : रे मन तूं सीधो सीधो चाल मन रे वश में चाले तो हो जावैला बर्बाद 

        प्रथम वक्ता में डॉ हरि दास हर्ष ने कहा चौपाल तो एक शैक्षिक क्रियात्मक मंदिर है जहां साहित्यकार अपनी सहजता से बहुत कुछ सीख सकते है और यथार्थ लेखन और व्यक्त कर परचम लहरा सकते है.. ज्योति स्वामी : इस मुश्किल को आसान कर दो तुम,थके हुए इस जीवन को अब फिर से आराम दे दो तुम.. शिव दाधीच : ये कैसा परिवेश देश का, न चिट्ठी, न संदेश, मोबाइल में कैद हो गए-अपने और परिवेश। बाबू बमचकरी : सब सच कहा एक पक्ष झूठा कह गई, जाते जाते वो मुझे बूढ़ा कह गई.. कैलाश टाक : बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, ठोकरें हमनें खाई तो समझ में आई बेटियां .. विशाल भारद्वाज : शहर की खामोशी बता रही हैं मंजर.. वली मोहम्मद गौरी रजवी : तुझको चाहा तुझे रुसवा नहीं करने वाले, हम सरे राह तमाशा नहीं करने वाले.. कासिम बीकानेरी ; लोग बे-बात का करते हैं तमाशा कैसे,.. फिर ये क्यूँ कहते हैं हंगामा है बरपा कैसेू

रामेश्वर साधक : हे साहित्यकारों.. श्रोत्रिय - सितारों “प्रभो-अनुकम्पा” पर नाज करो। हर जन्म में साहित्यकार बने हम, सद् कृतियों से परम तत्व को प्रणाम करो।। राजकुमार ग्रोवर आवारा पशु पक्षियों को भी हम खिलाते हैं, पकवान खीर हलवा पुरी.. खुशी सोनी : उनका होना जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद, मां मां मेरी ताकत मेरा होसला .. ओम प्रकाश भाटी : ये जीवन बड़ा अनमोल, तूं इसके प्रति दायित्व खोल.. राधा किशन सोनी : चल अकेला चल अकेला तेरा मेला पीछे छुटा जाए रे.. पवन चड्ढ़ा : दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा बर्बादी की तरफ..

     आज के कार्यक्रम में 20 साहित्य वृंद द्वारा प्रस्तुतियां दी गई आज के कार्यक्रम में मधुसूदन सोनी, चंद्र कला सोनी, गणपत सुथार, विष्णु विश्नोई, महेश हर्ष, पवन उम्मट, मधु बाला उम्मट, घनश्याम सौलंकी, काजल आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने अंदाज में श्रीमती ज्योति स्वामी ने किया, जबकि आभार सरदार अली परिहार ने किया 

जय साहित्य जय साहित्यकार 

सूचना संवाहक 

    रामेश्वर साधक

 


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